Karwa Chauth 2020 In Hindi, Karaka Chaturthi

Karwa Chauth 2020: भारत जैसे विशाल देश में बहुत से धर्म और  जाती के लोग रहते है। और हिन्दू धर्म में हर महीने कोई न कोई त्यौहार होता ही है। आप शायद जानते होंगे की करवा चौथ क्या है, लेकिन कुछ लोग नहीं जानते और यदि जानते भी है तो कुछ कुछ इसलिए आज मैं आपको करवा चौथ ( karwa chauth ) के बारे में full detail में बताने जा रहा हु ताकि आपको भी पता चल जाये की करवा चौथ क्या है? इसके साथ ही karva chauth images, karva chauth ki katha, karva chauth kab ki hai, karva chauth date ये सब आपको जानने को मिलेगा।  दीवाली या दीपावली क्यों मनाते है

करक चतुर्थी (करवा चौथ) क्या है? – Karaka Chaturthi (Karwa Chauth) Kya Hai? 

  हिन्दू धर्म में करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह त्योहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के चौथे दिन मनाया जाता है। करवा चौथ को करक चतुर्थी (Karaka Chaturthi) के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की सलामती और लंबी आयु के लिए निर्जल व्रत रखती है। महिलाएं करवा चौथ का व्रत सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक रखती हैं। ये व्रत बहुत कठोर और मुश्किल होता है इसमें खाना तो दूर की बात पानी की एक बूँद भी नहीं पी सकते। इसे सुहागन का त्यौहार कहा जाता है लेकिन विवाहित लड़कियां भी मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए इस त्योहार को मनाती हैं। करवा चौथ का त्यौहार हिंदू धर्म में पुरे भारत विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है,  और उत्तरी भारत पंजाब, हरियाणा,  राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश में सबसे अधिक मनाया जाता है। यह त्यौहार पूर्णिमा के दिन (शरद पूर्णिमा) के 4 दिन बाद पड़ता है। 2021 में करवा चौथ बुधवार 4 नवंबर को है ; जो कार्तिक के हिंदू महीने में कृष्ण पक्ष चतुर्थी है।   Dussehra 2020: Vijayadashmi.

Karwa Chauth 2021 Date in India Calendar – करवा चौथ 2021 डेट कलैंडर 

 
Karva Chauth 2021 – बुधवार – 4 नवंबर  

उपवास समय, चंद्रमा-उदय समय और  पूजा का मुहूर्त

  करवा चौथ के पूजा का समय चंद्रमा के उदय के समय पर निर्भर करता है। इसलिए, विभिन्न स्थानों में, इसकी पूजा का समय अलग-अलग हो सकता है।  

करवा चौथ पूजा का दिल्ली में मुहूर्त (2021)

  पूजा मुहूर्त – शाम 05:34 से शाम 06:52 तक अवधि – 01 घंटा 18 मिनट उपवास का समय – सुबह 06:35 से सुबह 08:12 तक अवधि – 13 घंटे 37 मिनट चन्द्रोदय – सुबह 08:12 बजे   छठ पूजा का त्योहार  

मुंबई में करवा चौथ का मुहूर्त (2021)

  पूजा मुहूर्त – शाम 06:04 से शाम 07:19 तक अवधि – 01 घंटा 16 मिनट  व्रत का समय – सुबह 06:40 से सुबह 08:52 तक अवधि – 14 घंटे 11 मिनट चन्द्रोदय – सुबह 08:52   Karwa Chauth 2020  

अहमदाबाद में करवा चौथ का मुहूर्त (2021)

  पूजा मुहूर्त – शाम 06:00 से शाम 07:16 तक अवधि – 01 घंटा 17 मिनट  उपवास का समय – सुबह 06:46 से सुबह 08:44 तक अवधि – 13 घंटे 58 मिनट करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय – सुबह 08:44  

करवा चौथ 2021 – 2025 तक, Karwa Chauth 2020 to 2025 Dates

 
  • Karva Chauth 2021- रविवार – 24 अक्टूबर 
  • Karva Chauth 2022 – गुरुवार – 13 अक्टूबर 
  • Karva Chauth 2023 – बुधवार – 1 नवंबर 
  • Karva Chauth 2024 – रविवार – 20 अक्टूबर 
  • Karva Chauth 2025 – शुक्रवार – 10 अक्टूबर 
 

करवा चौथ की कहानी (कथा): Story of Karva Chauth

 
वैसे तो बहुत सी कहानियाँ है करवा चौथ से जुडी हुई उन फेमस कहानियाँ में से कुछ कहानियाँ मै बताने जा रहा हु।  दिवाली मनाने के पीछे और क्या कारण   

रानी वीरवती की कहानी (कथा): Story of Queen Veeravati

  एक बहुत पुरानी कथा है कहा जाता है की एक सुंदर रानी वीरवती थी जो सात भाइयों की एकमात्र बहन थी। सातों भाई अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे। जब करवा चौथ का त्यौहार आया तो वीरवती ने भी व्रत रखा उस दिन वो व्रत रखने में असमर्थ थी फिर भी वो किसी तरह से ये व्रत नहीं तोरना चाहती थी। उसके भाइयों ने रात में उसके साथ रात का भोजन करने को कहा, लेकिन उसने चंद्रोदय से पहले कुछ भी खाने से इनकार कर दिया। उसके भाई उसे बहुत प्यार करते थे और अपनी बहन को उपवास की कठोरता नहीं देख पा रहे थे।  तब भाइयों ने पीपल के पेड़ के पत्तों के माध्यम से आग की मदद से दर्पण जैसी छवि बनाई और अपनी बहन से बोला चाँद उग गया है अपना व्रत तोड़ लो। बहन ने व्रत तोड़ा और खाना खाया। जब रानी ने अपना रात का खाना खाया, उसे खबर मिली कि उसके पति की मौत हो चुकी है। रानी वीरवती ने अपने पति के शव को रखी रही और उसके शव पर उगने वाले घाँस को हटतीं रही। फिर से करक चतुर्थी आया और रानी ने इस बार करवा चौथ का पुरे बिधि विधान से पालन किया और व्रत रखा।  जिसके फलस्वरूप उसे उसका पति दुबारा मिल गया।    Karwa Chauth 2020

महाभारत (Mahabharata) से करवा चौथ का सम्बन्ध: The relation of Karva Chauth with Mahabharata

महाभारत इस दिन को उस समय से जोड़ता है जब अर्जुन नीलगिरि में गए थे, अन्य पांडवों को अकेला छोड़कर। अर्जुन के अनुपस्थिति में पांडवो को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा और उनकी मदद करने के लिए, द्रौपदी ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की और भगवन श्री कृष्ण ने द्रोपदी को अपने पतियों की भलाई के लिए करवा चौथ का व्रत रखने के लिए कहा। द्रोपदी ने भगवन श्री कृष्ण के निर्देशों के अनुसार सभी अनुष्ठानों का पालन किया, और इससे पांडवों को सभी समस्याओं को दूर करने में मदद मिली।  

करवा चौत का इतिहास और कहानिया 

सत्यवान और सावित्री की कहानी: Story of Satyavan and Savitri

  एक बहुत ही जरूरी कहानी करवा चौथ से जुडी है  जब यमराज, सत्यवान के जीवन को प्राप्त करने के लिए आए, तो सावित्री ने यम के सामने उन्हें जीवन दान देने के लिए भीख मांगी। लेकिन यमराज नहीं मने और वो अड़े रहे, और सावित्री ने खाना-पीना बंद कर दिया और अपने पति को ले जाने के बाद यम का पालन करने लगी। सावित्री ने यमराज को मजबूर कर दिया की उसे कोई वरदान दे यमराज ने कहा कि वह अपने पति के जीवन को छोड़कर किसी और वरदान मांग ले। सावित्री ने कहा मुझे अपने बच्चे के साथ आशीर्वाद चाहिए। सावित्री पत्नीव्रता और निष्ठावान पत्नी थी और किसी भी तरह की व्यभिचार नहीं होने देगी। आखिर  कर सावित्री ने यमराज को मजबूर कर दिया की उसके पति के जान को बापस कर दे ताकि सावित्री के बच्चे हो सकें।  

करवा चौथ के अनुष्ठान (Rituals of Karva Chauth)

अब हम करवा चौथ के सम्पूर्ण अनुष्ठान को जानेगे जैसे करवा चौथ में मेहंदी का महत्त्व, सरगी, बाया और श्रृंगार आदि। 

करवा चौथ मेहंदी का महत्व (Importance of Karva Chauth Mehndi)

Karwa Chauth 2020 In Hindi, Karaka Chaturthi
 Karwa Chauth 2020 In Hindi, Karaka Chaturthi
करवा चौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाओ को मेंहदी लगाना एक ऐसी चीज है जिसे वे करवा चौथ में नहीं छोड़ सकते। हिंदू में, यह माना जाता है कि व्रत के दौरान मेंहदी लगाने से दीर्घायु में वृद्धि होती है, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है और पतियों की प्रजनन क्षमता को तेज करता है। मेहंदी के कला उन राज्यों पर निर्भर करते हैं, जो वे अपनाते हैं, वे जिस संस्कृति का पालन करते हैं, वे जिस क्षेत्र में हैं।  करवा चौथ सरगी (karva chauth sargi)   सरगी सबसे पहला अनुष्ठान है जो सूर्योदय से पहले सुबह में किया जाता है। एक विशेष थाली के हर खाद्य पदार्थ को गुलाब देना – विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों और व्यंजनों को पकड़ना चूँकि वे सूर्योदय के बाद पानी का घूंट भी नहीं पी सकते हैं। चंद्रमा को देखने के बाद ही अपना उपवास तोड़ सकते हैं।  

करवा चौथ बाया (karva chauth bya)

  भारत के कुछ क्षेत्रों में, सास-ससुर द्वारा इस त्योहार पर अपनी बहू को एक अनोखा उपहार भेजने का एक परंपरा है। सास इसमें किसी भी तरह का उपहार दे सकती है जो उसे अच्छा लगे।  Karwa Chauth 2020

करवा चौथ में श्रृंगार का महत्त्व: Importance of makeup on Karva Chauth

Leave a Reply