Pregnancy In Hindi | Symptoms Of Pregnancy

दुनिया की शायद ही कोई महिला ऐसी होगी जो मां बनने का सुख  नहीं भोगना चाहेगी। चाहे आप महिला हो या पुरुष आप सभी माता या पिता जरूर बनना चाहते होंगे। 

कई लोगों को इसकी इनफार्मेशन नहीं होती है और वो गलत चकरो में फँस जाते है नीम हाकिम, जादू टोना जैसे अंधविश्वास में पड़ जाते है। और अपना कीमती समय और पैसा दोनों बर्बाद कर लेते है। 

कई लोगो के मन में ये सवाल आता है की किस तरह से कोई महिला प्रेग्नेंट होती है ? आखिर इसकी क्या प्रक्रिया है ? ये सब आज मैं आपको इस ब्लॉग में बताने वाला हु। तो आज हम इस पोस्ट में यही जानेंगे कि गर्भधारण कैसे होता है इसके लक्षण क्या होते हैं।

 

प्रेगनेंसी क्या है? (Pregnancy in Hindi)

महिलाओं के गर्भाशय में यदि भ्रूण ठहर जाए तो उसे गर्भवती या (महिला पेट से है) कहा जाता है। आमतौर पर महिलाएं 9 महीने तक अपने गर्व में बच्चे को लेकर रखती है। ऐसी महिलाओं को गर्भवती महिला कहा जाता है।

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गर्भधारण कैसे होता है? गर्भधारण की प्रक्रिया क्या है? (How does pregnancy happen? What is the process of conception?)

Pregnancy In Hindi | Symptoms Of Pregnancy
Pregnancy In Hindi | Symptoms Of Pregnancy

जब महिला और पुरुष शारीरिक सम्बन्ध बनाते है तो पुरुष के लिंग द्वारा स्पर्म महिला के योनि में जाता है। जिसके बाद महिला के अंडाणु तक स्पर्म पहुँचता है। उसके बाद महिला को गर्भ धारण होता है।

इस क्रिया में 3 दिन से 7 दिन का समय लग सकता है। बच्चा मां के गर्भ में 40 हफ्ते का समय बिता सकता है। 36वें हफ्ते के बाद डिलीवरी की प्रक्रिया कभी भी शुरू हो सकती है। इस प्रक्रिया को प्रेगनेंसी या गर्भावस्था कहा जाता है। 

 

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प्रेग्नेंट होने के लक्षण (Symptoms of pregnancy in hindi)

 

 थका थका महसूस करना (Feel tired pregnancy in hindi)

 

यदि कोई महिला पूरे दिन थका हुआ महसूस करती है, और पहले की तुलना में अभी ज्यादा नींद आती है। तो यह भी एक गर्भावस्था का संकेत है। 

गर्भावस्था में महिलाओं को प्रोजेस्टेरोन नाम का हार्मोन रिलीज होता है जिसके कारण थकावट महसूस होती है। इस समय उनको देखभाल की ज्यादा जरूरत होती है अच्छे बहुत पोषक तत्वों की।

 

 जी मिचलाना उल्टी आना (Vomiting pregnancy in hindi)

 

गर्भावस्था के 2 सप्ताह के भीतर सुबह में मॉर्निंग सिकनेस (Morning sickness) यानी सुबह के समय में जी मिचलाना या उल्टी आना इसका एक लक्षण है।

 

यह लक्षण हर किसी महिला में एक जैसे नहीं होते हैं लेकिन 80% महिलाओं में यह लक्षण देखने को मिलते हैं। जी मिचलाना उल्टी आना शरीर में हार्मोनअल चेंजर्स के कारण होता है।

 

 बार बार पेशाब का आना (Frequent urination pregnancy in hindi)

अत्यधिक पेशाब का आना यह भी एक गरबा व्यवस्था के लक्षणों में से 1 लक्षण है। यदि कोई महिला सामान्य से ज्यादा बाथरूम का यूज कर रही है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।

 मूड का स्विंग होना (Mood swings pregnancy in hindi)

 

गर्भावस्था के पहले महीने में यह लक्षण नजर आते हैं। गर्भवती महिलाओं के मूड में बदलाव आता रहता है। जैसे वह किसी बात पर चिढ़ सकती है या फिर किसी बात पर अचानक उसे रोना आ सकता है। यह बदलाव महिलाओं में उसके शरीर में  हार्मोनल बदलाव के वजह से आते हैं।

 

स्तनों में सूजन का आना (Swelling of breasts pregnancy in hindi)

स्थान में सूजन गर्भावस्था के पहले महीने में नजर आता है। पर यह जरूरी नहीं है कि यह हर महिला के साथ ऐसा हो। गर्भावस्था में महिलाओं के स्तन टाइट हो जाते हैं और हल्का दर्द भी रहता है।

 

निप्पल के कलर में बदलाव (Change in color of nipple)

 

जैसे-जैसे गर्भवती महिलाओं के दिन में बढ़ोतरी होती है। धीरे-धीरे सारे लक्षण नजर आने लगते हैं जिनमें से यह लक्षण भी एक है। महिलाओं के स्तन के निप्पल का कलर डार्क होने लग जाता है। जिसे देखकर आप घर बैठे समझ सकती हैं कि आप प्रेग्नेंट है या नहीं।

 

शरीर के तापमान में वृद्धि (Rise in body temperature)

 

 गर्भावस्था के दौरान यह भी एक नॉर्मल सिम्टम्स है गर्भावस्था के। पहले महीने मैं गर्भवती महिला को बुखार जैसा फील हो सकता है। गर्भवती महिला के शरीर का तापमान बढ़ा हुआ नजर आता है, क्योंकि शरीर में हो रहे बदलाव के कारण मुझे नजर आते हैं।

 

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सिर में दर्द का होना (Headache pregnancy in hindi)

 

यदि आपके सिर में दर्द हो तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह गर्भावस्था के लक्षण होने से 1 लक्षण है जो शुरुआती महीने में नजर आते हैं।

 

भूख का बढ़ना (Increased appetite pregnancy in Hindi)

 

गर्भावस्था के पहले महीने में गर्भवती महिलाओं को पहले की तुलना में अधिक भूख लगने लगती है। यह वह समय है जिस समय आपको खाने पीने पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

 सूंघने की क्षमता में बढ़ोतरी (Increased smelling capacity in pregnancy)

 

गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के पहले महीने में सुनने की क्षमता दुगनी हो जाती है। क्योंकि महिलाओं के शरीर में हो रहे हार्मोन में बदलाव के कारण यह लक्षण नजर आते हैं।

 

 ये कुछ लक्षण है प्रेगनेंसी के जो आम तौर पर नजर आते है। जिसे आप अपने घर पर ही पता लगा सकते है की कोई महिला प्रेग्नेंट है या नहीं।

आइए अब हम जानते है की गर्भावस्था के आखरी महीने में क्या क्या लक्षण नजर आते है। 

 

नौवें महीने में होने वाले लक्षण: Symptoms of the ninth month in pregnancy

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गर्भावस्था के नौवें महीने में शरीर में बहुत तेजी से बदलाव आता है। प्रेगनेंसी के आखिरी महीने को सबसे ज्यादा मुश्किल माना जाता है। क्योंकि यह महीना शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार कर रहा होता है।

प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में महिलाओं का वजन 15 से 20 किलो तक और अधिक बढ़ जाता है। शिशु का आकार एक तरबूज के जितना हो जाता है और उसका वजन भी बढ़ जाता है। नौवें महीने में अत्यधिक भूख लगने लगती है।

आइए इन लक्षणों को विस्तार से समझते हैं –

 

गर्भवती महिलाओं का वजन का बढ़ना (Weight gain pregnancy in hindi)

 

प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में प्रेग्नेंट महिलाओं का वजन बढ़ने लगता है। साथ ही साथ इस समय बच्चे का वजन भी 2.5 से 3 किलो वजन बढ़ चुका होता है।

इस समय प्रेग्नेंट महिलाओं को सीढ़ियां चढ़ने में विस्तर से उतरने में काफी परेशानी होने लगती है। बेड पर लेटने  में दिक्कत होती है।

 

प्रेगनेंसी में नींद की कमी का होना (lack of sleep pregnancy in hindi)

 

प्रेग्नेंसी के नौवें महीने में नींद में कमी आने के कई कारण होते हैं। जिनमें से दर्द, ऐंठन, कमर के दर्द के कारण अत्यधिक पीड़ा होती है, जिस कारण नींद आना मुश्किल हो जाता है। रात के समय बार-बार पेशाब आना जिस कारण नींद में दिक्कत आती है।

 

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प्रेगनेंसी मैं हाथ पैरों में सूजन आना Swelling of hands and feet in pregnancy)

 

प्रेग्नेंसी के आखिरी महीने में प्रेग्नेंट महिलाओं के हाथ पैरों में सूजन आ जाती है और इसकी वजह से उन्हें काम करने में भी दिक्कत होती है।

 

 

गर्भावस्था के 1 से 9 महीने (1 to 9 months of pregnancy in Hindi)

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जब से महिला प्रेग्नेंट होती हैं और डिलीवरी होने तक शिशु और माँ दोनों में निरंतर परिवर्तन होता रहता हैं। अब हम जानेंगे कि 1 महीने से 9 महीने के बीच में बच्चे में क्या क्या परिवर्तन आता है?

प्रेग्नेंसी का पहला महीना

पहले महीने में निषेचन यानी फर्टिलाइजेशन के बाद शिशु की कोशिकाओं के साथ उसके पाचन तंत्र, स्नायु तंत्र, रक्त संचार प्रणाली की शुरुआत हो जाती है।

 

प्रेग्नेंसी का दूसरा महीना

 

दूसरे महीने में शिशु के हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क का विकास होने लगता है।

 

प्रेग्नेंसी का तीसरा महीना

 

तीसरे महीने में शिशु में काफी महत्वपूर्ण बदलाव आने लग जाते हैं। शिशु के गुर्दे और अंत कब बनना शुरू हो जाता है।

अग्नियोटिक फ्लड (Agniotic Floodमें शिशु हाथ पैर मारने लग जाता है। शिशु के चेहरे में उभार आना शुरू होता है। तीसरे महीने में शिशु के नाखूनों का विकास शुरू हो जाता है।

प्रेग्नेंसी का चौथा महीना

 

चौथे महीने में शिशु में कई तरह के बदलाव आते हैं। शिशु के प्राइवेट पार्ट विकसित हो चुके होते हैं। शिशु में चौथे महीने में रक्त संचार प्रणाली पूरी तरह से कार्य करने लगते हैं।

 

प्रेग्नेंसी का पांचवा महीना

 

पांचवे महीने में शिशु के शरीर पर बाल आने शुरू हो जाते हैं। इसी समय शिशु की आंखों के ऊपर भोयें आने शुरू होते है।और सर के बाल झड़ने लगते हैं। शिशु आप अपनी आंखों की मोमेंट कर सकता है। लेकिन अभी भी आंखें बंद रहती है।

 

प्रेग्नेंसी का छठा महीना

 

छठे महीने में शिशु के भजन में काफी बदलाव आता है। इस महीने में शिशु के हाथों की रेखाएं बनना शुरू हो जाती है। छठे महीने में शिशु अब बाहर से आ रही आवाजों पर अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करना शुरू कर देता है।

 

प्रेग्नेंसी का सातवां महीना

 

सातवां महीना शिशु के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है। इसी महीने से शिशु के मस्तिष्क का विकास तेजी से होने लगता है। सातवें महीने से शिशु के शरीर का विकास शुरू हो जाता है।

 

प्रेग्नेंसी का आठवां महीना

 

आठवें महीने में शिशु के हड्डियों का विकास तेजी से होने लगता है और हड्डियां मजबूत होने लगती है।आठवें महीने में शिशु का सिर बड़ा होने लगता है साथ ही पूरा शरीर विकसित हो चुका होता है।

प्रेग्नेंसी का नवा महीना

 

नौवे महीने में शिशु का संपूर्ण विकास हो चुका होता है अब यह डिलीवरी के लिए तैयार हो चुका होता है। अब घर में कम जगह होने के कारण वह हिलना डुलना कम कर देता है। नौवें महीने में शिशु का वजन 2.5 से 3 किलो का हो जाता है।

 

प्रेगनेंसी टेस्ट: Pregnancy test in hindi Home 

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जब महिलाओं को पहला पीरियड मिस हो जाता है तब उन्हें दिमाग में सबसे पहले बात यही आती है कि कहीं वह प्रेग्नेंट तो नहीं है। कई महिलाओं को इसकी जानकारी नहीं होने के कारण घबरा जाती है।

 

गर्भावस्था परीक्षण क्या है? (What is a pregnancy test?)

 

प्रेगनेंसी टेस्ट महिला के पेशाब में (एचसीजी/HCG) यानी ह्यूमन कोरियोनिक गोनाडोट्रोफिन की मौजूदगी और उसके लेवल का पता लगाया जाता है। इसके बाद पता चलता है कि कोई महिला प्रेग्नेंट है या नहीं। इस टेस्ट का यदि सही समय पर सही तरीके से किया जाए तो यह सही रिजल्ट देता है।

 

प्रेगनेंसी टेस्ट करने का सही समय क्या है? (What is the right time to do a pregnancy test?)

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प्रेगनेंसी टेस्ट पीरियड मिस होने के बाद ही करना चाहिए ताकि आपको सही रिजल्ट मिल सके। यदि आप पीरियड मिस होने से पहले टेस्ट करती है तो उसका सही रिजल्ट मिल पाना मुश्किल होता है। इसलिए इस टेस्ट का सही समय पर करना सही होता है 

 

प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें? (How to do pregnancy test?)

 

प्रेगनेंसी टेस्ट करना बहुत ही आसान है। आप इसे घर पर ही कर सकती है, बिना किसी परेशानी के।प्रेगनेंसी टेस्ट करने के लिए बाजार में मिलने वाली प्रेगनेंसी किट (Pregnancy kit) का आप इस्तेमाल कर सकते हैं। बाजार में बहुत सारी प्रेगनेंसी किट मौजूद है। 

 

प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका: (How to do pregnancy test)

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प्रेगनेंसी टेस्ट करना बहुत ही आसान है ये सारे स्टेप्स निचे दिए गए है –

  • आपको सबसे पहले अपने पेशाब को एक बर्तन में ले लेना है।
 
  • यह पेशाब हमेशा सुबह का होना चाहिए। तभी इसका रिजल्ट ज्यादा बेहतर आता है।
 
  • इसके के बाद कीट (Pregnancy kit) के साथ एक ड्रॉपर आता है उस ड्रॉपर से दो से तीन बूंद उस किट के खांचे में डालना है। उसके बाद आपको 5 मिनट वेट करना है, वैसे तो 1 से 3 मिनट के बीच में रिजल्ट दे देता है।
 
  • इसके बाद आपको उसमे एक या दो लकीरें नजर आएँगी। पहली लकीर का मतलब होता है कि वह मशीन सही से काम कर रही है। और दूसरी लकीर का मतलब होता है कि आप प्रेग्नेंट है। मतलब कि आपका टेस्ट पॉजिटिव है।
 

हमने इस पोस्ट में  Pregnancy In Hindi | Symptoms Of Pregnancy In Hindi, प्रेगनेंसी क्या है ? (Pregnancy in Hindi), गर्भधारण कैसे होता है? गर्भधारण की प्रक्रिया क्या है? (How does pregnancy happen? What is the process of conception?), प्रेग्नेंट होने के लक्षण (Symptoms of pregnancy in hindi), miscarriage ke baad pregnancy in hindi, नौवें महीने में होने वाले लक्षण: Symptoms of the ninth month in pregnancy,    प्रेगनेंसी टेस्ट: Pregnancy test in hindi Home, गर्भावस्था परीक्षण क्या है? (What is a pregnancy test?), प्रेगनेंसी टेस्ट करने का सही समय क्या है? (What is the right time to do a pregnancy test?), प्रेगनेंसी टेस्ट कैसे करें? (How to do pregnancy test?), प्रेगनेंसी टेस्ट करने का तरीका: (How to do pregnancy test)  इन सारे सवालों के जवाब जाने है।

आशा करता हु आपको मेरा ये पोस्ट पसंद आया होगा।

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